मेरा वो पहला प्यार(कविता..)

मेरा वो पहला प्यार…

मेरा वो पहला प्यार आज भी पहला ही है ।
अपने लड़की होने का वो एहसास आज भी पहला ही है॥

ना जाने कितने ही पल गुज़र गए उन लम्हों को जीए।
लेकिन तुम्हारे साथ बिताया हुआ हर वो पल आज भी पहला ही है ॥

तुम जान कर भी अनजान बने रहे और मेरे प्यार को ठुकरा कर चल दिये।
लेकिन तुम्हे ना पा सकने का वो दर्द आज भी पहला ही है॥

ज़माना बदला, तुम बदले और ज़िन्दगी ने हमारे रस्ते भी बदले ।
फिर भी किसी मोड़ पर तुम एक बार फिर मिल जाओ ये ख़याल आज भी पहला ही है ॥

मैं बेटी से लड़की, लड़की से पत्नी और पत्नी से माँ बनी ।
लेकिन एक बार तुम्हारी प्रेमिका बन के जीने का सपना आज भी पहला ही है॥

ज़िन्दगी से मेरी कोई माँग नहीं, इसने मुझे सब कुछ दिया है।
लेकिन तुमसे हर सवाल का जवाब मांगने का मेरा वो हक़ आज भी पहला ही है॥

मेरा वो पहला प्यार आज भी पहला ही है ।

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